आज है, चालीस, पचास साल पैली हमर पहाड़न में ऊण जाणा लिजि केएमओ (Kumaon Motor Owners Union) वालनेक गाड़ि हुनर भै कुछा, गीत भागन में कुमूंक नाम शार्ट करि बेर "कूँ" धरि दिनर भै , जसि " घुर - घुर जांछी मेरि कूँ मोटरा " । गाड़ि में ड्राइवर सैपनैकि सीट है पछिल सीट " अपर " , वी है पछिल वालि सीट "मिडिल" और सबन्है पछिल वालि "लोवर" कई जानेर भै । जनार पास बाकि डबल भया , या जो सरकारि मैस भया त ऊ अपर या मिडिल सीटन में बैठनेर भै , जां लूवैकि जालिक पार्टीशन हुनर भै , बाकि हमर जस लौंड -मौड, जनर पास बस टिकटक पैंस हुनर भै या जो गरीब भै , ऊ लोवर क्लास में बैठनेर भै । लोवर क्लासैकि भल चलै !! एक त साइड में सीट हुनर भै दुसर बीच में बसक टायर जाग घेरनेर भै , अब बची जाग में कंडक्टर ज्यूक जुगाड़ भै , जैलि डबल दी भै , वीक सामान दुसरनक खुटनाक तली , लड़ी झगड़ि बेर या ईजा बाबू कई बेर धरि दिनर भै । अपर और मिडिल क्लास वाल सैप लोग सिगरेटक फुंकर भरनेर भै और लोवर वाल गवाणी बीडी धुंगार खितनेर भै । लोवर क्लास में बैठी पैसेंजरनक उखाल बिखाल अलग लागि रुनेर भै , याँ बीड़ीक धूं , उखालनेकि बासैलि , दूसर पैसेंजरनैकि गाव गाव हुनेर भै । हर द्वी तीन मैल बाद स्टाप हुनर भै , यो है बाहीक जब क्वे सवारि दिखनेर भै त , कंडक्टर सैप धात लगूनेर भै , " रुको हो " !! ड्राइवर सैप !! सवारि ली लियौ !! "
अल्माड़ बटी , बेड़नाग हूँ बाट लागि भयूँ , आदु किलो बाल मिठै झ्वाल में धरि बेर बस में बैठि गयूं । हिटण जाणे , कंडक्टर और ड्राइभर सैपैली अत्ति ढील करि दे , नै ध्वे बेर , ख्वार में टोपि लगै , कपाव में पिठया झमकै बेर , असीक टोपि में खोसि बेर पूजि गै कूंछा !! एक मैस जो ड्राईवर सैपन कणी जाँणनेर भयो , कूँण लागि ," किलै हो पाठकज्यू !! याइ एतुक ढील करि हाली , अब कब पुजूनेर भया तुम बेडिनाग ? ड्राइवर सैपलि कंडक्टर हूँ धात लगै ," सब बैठ गईं रे गोपिया ? मैं गाड़ि चलूँनु , फिर जन कये कि फलांण छुटि गौ !! खिसियै बेर कंडक्टर कूँण लागि ," हिटौ हिटौ हो ड्राइवर सैप ! सब बैठ गईं , अब जो छुटलो त धात लगै ल्योल " ।
अल्माड़ बटी बेड़नाग हूँ वाया कोसी, गरुड़, बैजनाथ, सोमेश्वर और बागसर जाण हुनेर भै , शेरघाटक बाट तब नि बणी भै । अल्माड़ बस स्टेशन बटी कोसि तक पन्द्र बखत गाड़ि रोकि बेर पैसेंजर बिठाई गै , जब अत्ति हैगे , तब फिर ज्योशज्यू बलाण ," अरे ! जाग जाग रोकि बेर तुम अधरात्तै पुजाला " । खैर, फिर ड्राइवर सैपनैलि खटाखट गाडि चलै कुँछा । गरुड़ पूजण है पैली एक गौं पड़ि , वांक मैस और सैंणी सड़काक किनार ठाड़ हई भै , उ आपण चेलि कनि विदा करुं हूँ आई भै , एक मैसेलि गाड़ि कनि हाथ दियो , गाड़ि रुकण बाद सब सैंणी टिटाट करण बैठि , एक एक करि बेर सब सैंणी ऊ चेलिक्ण अँगाल हाल्नेर भै कुंछा , एकाध त यस डाड हाल्नेर भै कि कस जस है गे । ऊ चेलिल लाल साडि पैरी भै मली बटी रंगवाई पिछौड़ खिती भै , वीक दुल्हौ जो उकणी विदा करूण हूँ आई भै वील पिंगलो कोट और तली बटी हरी पैंट पैरी भै , उ यो दुनियादारी है दूर ठाड़ बिडि फूंकण लागि भै । ततजानै कंडक्टर सैप झीकान हैगे , उ जोरैली कूँण लागि ," किले हो पधान ज्यू है गो त सैँणिनक डाड - डुक्क !! हिटनु पै अब ? " पधान ज्यू कूँण लागि ," जागो हो कंडक्टर सैप , येकि बुब उणै , वील भेट नि करि राखि " । तालै चाऔ त , मल गाड बटी वीक बुब डाड मारने ऐगे अँगाल हालि बेर कूँण लागि ," भली कै जाए चेली आपुंण सौरास ! जेठक घाम नि लागौ तेकणी , चौमासक द्यो नि भिजऔ , पूसक घाम तापिये , तेरि बाखइ धन धानेलि भरी रौ , गोर -बाछ , धिनालि बणी रौ , बचि रूण चैनेर भै भुली , शिबौ ! कतुक झटकि गै छै तु , सौरास में निसासी जाली त बाटुई लगाये , मैतक मान धरिये चेली , जा ! पै !! जा !!! "।
उ दुल्हौ - दुल्हैंनिक बैठणक बाद गाड़ि फिर हिट दे । गरुड़ पूजी बेर , ड्राइवर सैपनैलि , एक दुकानैक सामणि बस रोकि , दुकानदारैली ड्राइवर सैपान कनि एक चिठ्ठी दी बेर कौछ , यो चिठ्ठी बगसर म्यार दाज्यू कनि दी दिया हो " ड्राइवर जब गाड़ि अघिल कै लीजाण लॉग , त दुकानदार कूँण लग ," जागौ हो ड्राइवर सैप, चहा पी जाऔ ,गडबडान बड़े राखौ तुमर लिजी " और फिर ड्राइवर सैप चहा पिण बैठ गे । गरुड़ बस स्टेशन में फ़िर गाड़ि रुकि , यां कंडक्टर सैपेलि , एक बोरी बिड़िक बण्डल , लोवर क्लास में धरि दे , वीक बासैलि , सोमेश्वर पूजण है पैली , कतुकन उखाव हैगे । सोमेश्वर में तीन चार सवारि उतरि त पांच छै नई बैठ गे , कंडक्टरैली याँ गूड़ेकी भेलि धरै दीं , अब त जागै नि भै , जसि कसि असज मं बैठि बेर जाण पड़ि, के कई जाऔ अघण !!
बागसर पूजण जाणे ड्राइवर और कंडक्टर कनि भूख लागि गे , एक होटलक सामुणी गाड़ि रोकबेर द्वीनू खाण बैठि गे , अब सवारिनैलि ले रैत और पकौडि खाण शुरू करि दे , जतुक रैत और पकौडि बेचीनेर भै उतुकै इन लोगनक कमीशन हुनेर भै , खाण - पिण घातक भै । बागसर में उ दुल्हौ दुल्हैंणि उतरि गे , बाटभर दुल्हैंणिक , उखालनै - उखालनै बिडौल है गे , बिचारिल जतुक सिँगल पू खाई भै , सब भ्यार खिती गे । एक घंट बागसर रुकना बाद , गाड़ि अब धारै - धार जाण लागि , बाटभर सवारिनैकि बैठण उतरण लागि भै , कंडक्टर सेपैकि भल कमै हई भै । क्वारब पुजि बेर ड्राइवर कूँण लागि ," अब आदू घंटाक हाल्ट छ भाई , जनन कनि हल्क हुंण छ या चहा पिंण छ , जल्दी करौ , अब गाड़ि सिद्ध बेड़नाग रुकैलि , मस्त ढील है गे , संधिकाल छै बाजिया बाद गाड़ि चलूँण बंद है जांछ "अब ज्योषज्यू रिषाण लागि ,' होय !! होय !! ढील त हमैलि करी भै , तुम त जसि बिना रोकी गाड़ि खींचणौ छ " रत्ते सात बाजि अल्माड़ बटी ब्यालाक छै बाजि बेड़नाग पुजूंणौ छा , धन्य हो पाठक ज्यू !!

No comments:
Post a Comment